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लेखनी कहानी -15-Dec-2021

"एक सवेरा था 

जब हंस के उठते थे हम, 
और 
अब कई बार बिना मुस्कराये ही 
शाम हो जाती हैं।"

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3 Comments

Sudhanshu pabdey

16-Dec-2021 03:59 PM

Nice

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Priyanka Rani

15-Dec-2021 08:25 PM

सुंदर

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Swati chourasia

15-Dec-2021 07:16 PM

Nice

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